इंसानियत सबसे पहले है!

संवाददाता, जालंधर : किसी कौम से नफरत करना और उसका खून बहाना बेशक इंसानियत पर दाग है। किसी निर्दोष का खून जब आपके किसी परिजन के सीने पर लगा मिलता है तो इस कत्ल के लिए घिन्न आना स्वभाविक है। आखिर क्यों जब एक शख्स अपराध करता है तो पूरी कौम को खलनायक बना दिया जाता है। आखिर हर इंसान को धर्म की पहचान से ही क्यों देखा जाता है? समर खान द्वारा निर्देशित फिल्म शौर्य यही सवाल उठाती है। इस फिल्म का प्रदर्शन रविवार को पीपल्स वायस एनजीओ ने देश भगत यादगार हाल में किया। पीपल्स वायस ऐसा एनजीओ है, जो गंभीर सिनेमा द्वारा जन जागरण के लिए प्रयासरत है। रविवार को दिखाई गई फिल्म शौर्य एक ऐसे फौजी की कहानी है जो मुसलमान है। वह इस लिए अपने अधिकारी को गोली मार देता है, क्योंकि वह मासूम लोगों को गोली का निशाना बनाता है। धर्म के नाम पर नफरत से भरे हिंदू फौजी अधिकारी के जरिए फिल्म निर्देशक ने यह संदेश देने की कोशिश है कि इंसानियत सबसे पहले है। एक व्यक्ति अपराध करता है तो उसकी जिम्मेदार पूरी कौम नहीं होती, मुसलमान होना अपराध नहीं है। नायक राहुल बोस मुसलमान फौजी को अन्याय से बचाता है। फिल्म यह भी कहती है कि शौर्य का मतलब होता है हिम्मत। आप में किसी को इंसाफ दिलाने की हिम्मत होनी चाहिए न की किसी को दबाने के लिए। पीपल्स वायस संगठन के सदस्य कुलविंदर ने बताया कि फिल्म शो का सिलसिला जारी रहेगा।